इश्क़ फौजी का



 

सृष्टि सिंह राजपूत


तारों और समंदर से ये 
हम कहते चले गए
जाने हुआ कब इश्क़ 
हम बहते चले गए
क्या लगता है आपको की 
तोड़ा है हमने दिल आपका
पहले हमने खुद का दिल तोड़ा 
फिर हर दर्द हम सहते चले गए
उम्मीद है कि हम मिले 
या ना मिले कभी
जो भी मिला था मुझे आपसे 
वो गम या खुशी 
दूर रहकर भी हम 
आपसे की करीब हूं कितना
हम बार बार और 
हरबार ये कहते चले गए............
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सृष्टि सिंह राजपूत

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