घर की याद

आंखों में आंसू आए थे 
जब हमने कदम बढ़ाए थे 
घर यादें पीछे छूटे थे 
कुछ अपने भी तो रूठे थे 


हो कोई चाहत थी 
दिल के अंदर 
जीतू में सारे समंदर 
दिल मेरे भी तो रोए थे 
जब हमने साथी खोए थे 
हो छूट रहा था यार मेरा
हां  छूट रहा था प्यार 
मेरा हर पल हंसने वाली 
आंखें भी तो पलकों
में छुप कर रोए थे 


अब आंखों के आगे 
घूम रहा था यादों का वो आईना रोई-रोई आंखें मेरी 
पर रोई जाए ना 
एहसास मुझे अब हो रहा था
प्यार मां बाप का 
भाई के लड़ाई-झगड़े 
और खाना 
बहन के हाथ का............ next coming soon... please like subscribe and share 😎😎😎
@sristisinghrajput.

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